इंदौरउज्जैनधर्म धार्मिक

दो दिवसीय राष्ट्रीय अधिवेशन में आस्था भक्ति और समर्पण का सैलाब

● गच्छाधिपति नित्यसेन सूरीश्वरजी सहित गुरु भगवंतों ने दिया मार्गदर्शन, हजारों गुरु भक्तों की रही सहभागिता

● गुरुदेव की मंगलकारी जयकारों से गूंजा केसरी वाटिका हुआ

सचिन भंडारी   (जैन समाज मीडिया प्रभारी)

इंदौर (म.प्र.) –  आस्था, श्रद्धा और समर्पण के अद्धभुत संगम के बीच आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन में देशभर से आए हजारों गुरु भक्तों ने सहभागिता कर धर्म, संस्कार और संगठन की एकजुटता का परिचय दिया। अधिवेशन का वातावरण आध्यात्मिक ऊर्जा, भक्ति भावना और संकल्पों से ओतप्रोत रहा।

कार्यक्रम में गच्छाधिपती श्री नित्यसेन सूरीश्वरजी महाराज साहब सहित अनेक पूज्य गुरु भगवंतों का सान्निध्य एवं मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। गुरु भगवंतों ने अपने प्रेरणादायी उद्बोधन में धर्म के प्रति आस्था, जीवन में सदाचार, सेवा भावना और संगठन की शक्ति को महत्वपूर्ण बताया। आपने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों को जीवन में अपनाकर समाज में सकारात्मक परिवर्तन लाया जा सकता है।

     ◆ अधिवेशन का शुभारंभ दीप प्रजलन और                                मंगलाचरण से हुआ ◆

मंचासीन अतिथियों द्वीप प्रज्वलित किया इंदौर श्री संघ से स्वागत उद्बोधन चातुर्मास समिति अध्यक्ष नीरज सुराणा श्री संघ अध्यक्ष धनराज संघवी द्वारा दिया गया राष्ट्रीय परिषद से प्रकाश छाजेड़ तरुण परिषद से आदित्य धोखा जयंतीलाल संघवी मोहित तांतेड़ रमेश जी धाड़ीवाल सुरेंद्र लोढ़ा रमेश धरू सहित वक्ताओं ने संबोधित किया भरतपुर ट्रस्ट अध्यक्ष बाबूलाल संघवी द्वारा द्विशताब्दी महोत्सव पर आने का निमंत्रण दिया कार्यक्रम के मुख्य अतिथि के रूप में मध्य प्रदेश शासन के कैबिनेट मंत्री चैतन्य जी कश्यप ने अपने उद्बोधन में कहा कि परिषद ने हमेशा ही सेवा कार्य को महत्व दिया है सेवा के माध्यम से हमें परोपकार के कार्य करना है आपने अपने पारिवारिक योगदान के बारे में कहा कि पूर्ण सम्राट के आदेश का पालन करते हुए अन्य कार्यों में सहभागिता की है इस अवसर पर अतिथियों में राजेंद्र दगवाड़ा मुकेश नाकोड़ा सहित संघ एवं परिषद के वरिष्ठ जन एवं परिषद के पदाधिकारी मंचासीन थे

               ◆ गुरु सेवा में सोहेब भाई ◆

धर्म से मुस्लिम सोहेब भाई ने अपने हाथों की कला से गुरु भगवंतो की नस सम्बन्धी अनेक बीमारियों को खुदा के द्वारा प्राप्त कला से दूर किया है सोहेब भाई ने बिना किसी आर्थिक लाभ के सेवा को ही धर्म मानते हुए अपना समर्पण दिया है जहां आपका बहुमान इंदौर संघ के द्वारा किया गया पूज्य मुनिराज विद्ववरत्न विजय जी महाराज साहब ने आपकी सेवा की पूरी पूरी अनुमोदन की है।

          ● मुनिराज श्री की मुखारविंद से ●
इस अवसर पर पूज्य मुनिराज *सिद्ध रत्नविजय जी महाराज साहब* ने संबोधित करते हुए कहा कि हमें पद का मोह नहीं रखना है समर्पण भाव से कार्य करना है पूर्ण सम्राट द्वारा संघ एवं परिषद के प्रति अपने जीवन में किए गए त्याग को ध्यान में रखते हुए प्रगति के पथ पर बढ़ना है

*पूज्य मुनिराज विद्वरत्न विजय जी महाराज साहब* ने कहा कि स्वार्थ को त्याग कर सेवा समर्पण का अलख जगाना है परंपरा का पालन करते हुए परिषद की गरिमा को शिखर पर पहुंचाना है यतींद्र जयंत नित्य का आशीर्वाद आप सभी गुरु भक्तों पर बरस रहा हे

*पूज्य मुनिराज चारित्र रत्न विजय जी महाराज साहब* ने कहा कि किसी भी संस्था में अनुशासन का होना बहुत जरूरी है आपने धर्म और कर्तव्य के अंतर को विस्तार पूर्वक समझाया तथा कहा है कि पद मिले या ना मिले व्यक्ति को हमेशा अपने कार्यों का मूल्यांकन करवाना चाहिए ताकि पद उसके पास चलकर आए

*इस अवसर पर पूज्य मुनिराज प्रसम सेम श्रीजी महाराज साहब* ने संबोधित करते हुए कहा कि जहां त्याग समर्पण की भावना होती है वहां सफलता अपने आप मिल जाती है आपने कहा कि समय का मूल्यांकन हमें करना है मुश्किल से मिले इस मानव जीवन को सदाचार सेवा परोपकार के कार्य में लगाना चाहिए आपने कहा कि आज की युवा पीढ़ी मोबाइल लैपटॉप और भौतिकता में व्यस्त है किंतु धर्म संस्कार की ओर हमें बढ़ाना चाहिए
संगठन में ही शक्ति हे।

     ● परिषद के प्रतिनिधियो ने बताए सेवा कार्य ●

भारतवर्ष से अनेक शाखाओं से पधारे अध्यक्ष एवं पदाधिकारीगण द्वारा अपनी अपनी शाखाओं में सेवा जीव दया परोपकार सहायता शिक्षा चिकित्सा के क्षेत्र में तथा विभिन्न क्षेत्रों में किए गए रचनात्मक एवं सेवा कार्यों के बारे में उपस्थित गुरु भक्तों को अवगत कराया गया इस कार्यक्रम को संपन्न करवाने में राष्ट्रीय पदाधिकारी राजकमल दूगड़ का सहयोग रहा

            ◆ पुरस्कारों का हुआ वितरण ◆

अलग-अलग शाखाओ से प्राप्त प्रतिवेदनों के आधार पर किए गए कार्यों का मूल्यांकन करने के बाद पुरस्कार वितरण समिति द्वारा चयनित कि गई शाखाओ को अलग-अलग क्षेत्र के विभिन्न पुरस्कारों का वितरण राष्ट्रीय पदाधिकारी द्वारा शाखा अध्यक्ष महामंत्री को प्रतीक चिन्ह देकर सम्मानित किया इस कार्यक्रम को शांतिलाल गोखरू ने संपन्न करवाया

■ गच्छाधिपति के मुखारविंद से हुई राष्ट्रीय प्रांतीय पदाधिकारीयो की घोषणा ■

गच्छाधिपति ने विभिन्न प्रदेशों के साथ-साथ राष्ट्रीय पदाधिकारीयो के पद की भी घोषणा की तथा विस्तृत गठन को समय पश्चात करने की घोषणा की गई

*गुरु भक्तों ने दर्शन वंदन कर लिया आशीर्वाद*

राष्ट्रीय अधिवेशन में विभिन्न क्षेत्रों से आए गुरु भक्तों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। श्रद्धालुओं ने गुरु भगवंतों के दर्शन, प्रवचन और आशीर्वचन का लाभ प्राप्त किया। पूरे आयोजन में अनुशासन, समर्पण और धार्मिक भावनाओं की झलक देखने को मिली।

अधिवेशन के दौरान धर्म संरक्षण, संस्कारों के संवर्धन और समाज में एकता एवं सहयोग की भावना को मजबूत करने का संकल्प लिया गया। उपस्थित गुरु भक्तों ने आपसी एकजुटता के साथ आध्यात्मिक मार्ग पर आगे बढ़ने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।

आयोजन स्थल पर भक्ति, सेवा और समर्पण का वातावरण बना रहा। देश के विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचे श्रद्धालुओं ने इस अधिवेशन को आध्यात्मिक चेतना और संगठनात्मक शक्ति का प्रेरणादायी अवसर बताया।

राष्ट्रीय अधिवेशन ने गुरु परंपरा के प्रति श्रद्धा, समाज की एकता और धर्म के प्रति समर्पण का संदेश दिया।
संचालन सुधीर लोढ़ा ने किया
उक्त जानकारी महिदपुर रोड जैन समाज मीडिया प्रभारी सचिन भंडारी ने दी

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