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संसार में सुख होता तो तीर्थंकर भगवान घर संसार छोड़कर नहीं जाते

संसार में सुख होता तो तीर्थंकर भगवान घर संसार छोड़कर नहीं जाते

_साध्वीश्री मधुबालाजी ने गुरुवार को बखतगढ़ में धर्मसभा में कहा

बखतगढ़ (धार) – जीव घर संसार में सुख ढूंढ़ रहा हैं। यदि संसार में सुख होता तो तीर्थंकर भगवान घर संसार छोड़कर नहीं जाते। सूर्य की एक किरण अंधकार को दूर भगा देती है। इसी तरह ज्ञान रूपी एक किरण जीवन में आती है तो अज्ञान खत्म कर देती है। संसार से मोह घटाने का प्रयत्न अर्थात जीव सही दिशा में जा रहा है। सही समझ और वैराग्य आता है तो वह आत्मा को उत्थान की ओर आगे बढ़ाने वाला है। पुरुषार्थ करेंगे तो निश्चित ही शाश्वत सुख मिलेगा। तीर्थंकर भगवान की जिनवाणी हमें जगाने आई है। सही दिशा की ओर दृढ़ता से कदम बढ़ाना चाहिए। उक्त प्रेरणादायी उदगार जिनशासन गौरव आचार्यश्री उमेशमुनिजी के सुशिष्य धर्मदास गणनायक प्रवर्तकश्री जिनेंद्रमुनिजी की आज्ञानुवर्तिनी साध्वीश्री मधुबालाजी ने गुरुवार को श्री वर्धमान स्थानक भवन बखतगढ़ में व्यक्त किए।

            संसार में चिंताओं का भंडार है

साध्वीश्री मलयाजी ने कहा कि संसार खतरा है। इस खतरे से जीव को बाहर निकलना है। संसार में चिंताओं का भंडार है। संसार में सुख नहीं है। सुख चाहिए तो संयम अंगीकार करे। संसार के साधन केवल कर्मों को बांधने वाले हैं, दुख देने वाले हैं। अष्ट कर्मों को क्षय करने के लिए नवकार महामंत्र की आराधना करना चाहिए। जीव की जहां भी आसक्ति होती है, वहीं उसकी उत्पत्ति होती है। बेईमानी, अनीति से कमाया गया धन केवल दुख ही दुख देने वाला है।

   साध्वी वृंद का 10 दिन तक मिला पावन सानिध्य

यहां साध्वीश्री मधुबालाजी, श्री सुनीताजी, श्री मलयाजी, श्री कलाश्रीजी, श्री श्रद्धाजी एवं श्री समताजी ठाणा 6 के पावन सानिध्य का श्रीसंघ को पूरे 10 दिन तक लाभ मिला। साध्वीश्री मलयाजी ठाणा 3 ने दोपहर में बखतगढ़ से विहार कर मांगलिया में प्रवेश किया। शुक्रवार को प्रातः वहां से विहार कर बदनावर जाने के भाव है। वहीं साध्वीश्री मधुबालाजी ठाणा 3 की शुक्रवार को प्रातः सूर्योदय के बाद बखतगढ़ से बदनावर के लिए विहार होने की संभावना है।

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