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जीव वह है जिसमें चेतना होती और वह सुख – दुःख का अनुभव कर सकता है

मुनि वृंद के सानिध्य में 15 मार्च रविवार को होगी अभिनव सामायिक

तेरापंथ जैन संतश्री कोमलकुमारस्वामीजी ने जैन उपाश्रय भवन बखतगढ़ में महती धर्मसभा में फरमाया।

दिलीप दरड़ा 

बखतगढ़ (धार) –  जीव एवं अजीव दो तत्वों से संसार बसा हुआ है। जीव वह होता है जिसमें चेतना होती है, वह सुख और दुख का अनुभव कर सकता है। जबकि अजीव पुद्गल का बना हुआ होता है, वह जड़ पदार्थ है। अजीव के बिना जीव नहीं रह सकता और जीव के बिना अजीव नहीं रह सकता। श्रावक श्राविकाओं को नव तत्व एवं छह द्रव्य का ज्ञान अवश्य होना चाहिए। जब उसका ज्ञान हो जाता है तो उसमें सम्यकत्व ठीक प्रकार से टिक सकता है। इसके बिना यदि सम्यकत्व आएगा तो वह बहुत कम समय के लिए टिकेगा। उक्त प्रेरणादायी उदगार तेरापंथ आचार्यश्री महाश्रमणजी के आज्ञानुवर्ती श्री कोमलकुमारस्वामीजी ने 14 मार्च को जैन उपाश्रय भवन बखतगढ़ में धर्मसभा में व्यक्त किए।

         चार कारणों से जीव नरक में जाता है

नरक में जाने के चार मुख्य कारण बताए गए है। परिग्रह करने पर, आरंभ समारंभ करने पर, पंचेंद्रीय जीव की हत्या करने पर और मांसाहार करने पर जीव को नरक गति मिलती है। हमें यह मनुष्य भव बड़ी दुर्लभता से मिला है। इसको सार्थक करने के लिए हमें इसका सदुपयोग कर लेना चाहिए। संयम जीवन अंगीकार करके साधना आराधना के माध्यम से संसार सागर के परिभ्रमण से मुक्त होकर हम मोक्षत्व को प्राप्त कर सकते हैं।

       आश्रव के कारण कर्मों का बंध होता है

पापी आत्मा हर समय पाप कर्म को भोगती है, हर समय रोती रहती है, दुःख भोगती है और अपने कर्मों के कारण वह भयभीत होती है। कर्मों के आने का द्वारा आश्रम है। सामायिक में 18 पाप के दरवाजे बंद हो जाता है, व्यक्ति संवर में आ जाता है। आश्रम के कारण हर समय कर्मों का बंद होता रहता है, कर्मों का कचरा हर समय चालू रहता है। जीव को प्रमाद नहीं करना चाहिए, सदैव जागरूक रहना चाहिए और क्रोध, मान, माया लोभ रूपी कषाय को छोड़ देना चाहिए। साथ ही योग ऐसा बनाएं कि हम साधु बन जाए आत्मा में कर्म का बंधन नहीं करें।

मुनि वृंद के सानिध्य में रविवार को होगी अभिनव सामायिक

मुनिश्री सिद्धार्थकुमारस्वामीजी प्रतिदिन एक अद्भुत ध्यान करवा रहे है। इससे सभी में एकाग्रता बन रही है। यहां प्रतिदिन प्रातः 06 : 15 से 07 : 15 बजे तक भक्तामर स्तुति, प्रार्थना, प्रातः 09 : 15 से 10 : 15 बजे तक व्याख्यान, दोपहर 2 से 3 बजे तक ज्ञान चर्चा, शाम 06 : 30 से 07 : 30 बजे तक गुरु वंदना व प्रतिक्रमण एवं रात्रि 8 से 9 बजे तक व्याख्यान हो रहे है। श्रावक श्राविकाएं समय समय पर आयोजित सभी आराधना कार्यक्रम में भाग लेकर लाभ ले रहे है। रविवार 15 मार्च को मुनि वृंद के पावन सानिध्य में अभिनव सामायिक का आयोजन होगा। गौरतलब है कि पिछले रविवार को भी उक्त अभिनव सामायिक आराधना में श्रावक श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लेकर आराधना का लाभ लिया था।

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