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तेरापंथ जैन संतश्री कोमलकुमारमुनिजी म. सा. ठाणा 2 के सानिध्य में 19 मार्च को बखतगढ़ में मनायेंगे नववर्ष संवत्सर प्रतिपदा गुड़ीपड़वा दिवस

बखतगढ़ तेरापंथ संघ ने आयोजन में भाग लेने का किया आह्वान

दिलीप दरड़ा 

बखतगढ़ (धार) –  तेरापंथ आचार्यश्री महाश्रमणजी म. सा. के आज्ञानुवर्ती संतश्री कोमलकुमारमुनिजी एवं संतश्री सिद्धार्थकुमारमुनिजी ठाणा 2 के सानिध्य में बखतगढ़ में 19 मार्च गुरुवार को नववर्ष संवत्सर प्रतिपदा गुड़ीपड़वा दिवस जप, तप, त्याग, धर्म, ध्यान आदि विभिन्न आराधनाओं से मनाया जाएगा। प्रातः 9 बजे मुनिश्री के मुखारविंद से विशेष प्रवचन होंगे। जिसमें उक्त दिवस के महत्व पर विशेष रूप से विस्तार से प्रकाश डालेंगे। साथ ही बड़ा मंगल पाठ एवं मंत्रों का जाप भी किया जाएगा। कार्यक्रम के पश्चात स्वामी वात्सल्य का आयोजन होगा। बखतगढ़ तेरापंथ संघ ने नगर एवं क्षेत्र सहित दूरदराज के श्रीसंघों से दर्शन, वंदन, मांगलिक श्रवण के साथ आयोजन का लाभ लेने का आह्वान किया।

      ● मनुष्य जीवन से मोक्ष प्राप्त कर सकते ●

मंगलवार 17 मार्च को बखतगढ़ के जैन उपाश्रय में आयोजित धर्मसभा में श्री कोमलकुमारमुनिजी ने कहा कि मृत्यु सदैव जीव के पास रहती है। जीवन का एक पल का भी भरोसा नहीं। मृत्यु कभी भी आ सकती है। मृत्यु आती है तो व्यक्ति डर जाता है। हम समझते है कि जो व्यक्ति संसार में आया है उसे एक दिन जाना ही है। चारों गति के जीव में कोई भी अमर नहीं रहता। जो मृत्यु को समझ जाए वह इस मनुष्य जीवन को सार्थक करके मोक्ष प्राप्त कर सकता है, नर से नारायण बन सकता है। मनुष्य जीवन ही सर्वश्रेष्ठ है। इसके माध्यम से जीव को मोक्षत्व की प्राप्ति होती है।

     ◆ चार कारण से मनुष्य जीवन मिलता है ◆

मनुष्य बनने के चार कारण बताए गए है। इसके अंतर्गत व्यक्ति में सरलता, विनम्रता, दया के भाव होने के साथ ईर्ष्या नहीं होना चाहिए। तभी मनुष्य भव मिलता है। ईर्ष्या से पाप कर्मों का बंध होता है। ईर्ष्या को आग की उपमा दी गई है। ईर्ष्या की आग से व्यक्ति जल जाता है।

आयोजित धर्मसभा में उपस्थित समाजजन।

           ● विनय से व्यक्ति महान बनाता है ●

विनय से व्यक्ति महान बनता है। व्यक्ति किसी का सहयोग करता है तो उसे भी आगे सहयोग मिलता है। घर के बुजुर्ग व्यक्तियों को धर्म से जोड़ना चाहिए। इससे धर्म से जोड़ने वाला और धर्म करने वाला दोनों का फायदा ही होगा और अपने कर्तव्य का पालन भी हो जाएगा। धर्म करना और करवाना तथा त्याग करना और त्याग करने वालों की अनुमोदना करने से कर्म की निर्जरा होती है।

श्रावक – श्राविकाओं व बच्चों ने विचार स्तवन प्रस्तुत किए

पूर्व संध्या सोमवार शाम को गुरु वंदना एवं प्रतिक्रमण के पश्चात मुनिश्रीजी के सानिध्य में श्रावक-श्राविकाओं एवं बच्चों के लिए विचार एवं धार्मिक स्तवन प्रस्तुत मंच का आयोजन किया गया। इसमें सभी ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। ऐसे कार्यक्रमों में भाग लेने से बोलने और गाने के लिए व्यक्ति की हिचकिचाहट दूर होकर निर्भीकता बनती है।

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